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कच्‍ची हल्‍दी के फायदे – दिलाए राहत गले की खराश, सर्दी-जुखाम और अपच से

हल्दी पावडर की जगह कच्‍ची हल्‍दी का प्रयोग करना काफी फायदेमंद हो सकता है।

अगर आप कच्‍ची हल्‍दी को नियमित अपने आहार में शामिल करेंगे तो आपको, गले की खराब और अपच जैसी बीमारियों से हमेशा के लिये छुटकारा मिल सकता है।

सर्दियों के मौसम में हल्दी की गांठ का उपयोग सबसे अधिक लाभदायक है और यह समय हल्दी से होने वाले फायदों को कई गुना बढ़ा देता है क्योंकि कच्ची हल्दी में हल्दी पाउडर की तुलना में ज्यादा गुण होते हैं।

भारतीय खाने की हल्दी के बिना कल्पना करना भी मुश्किल है।

 

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कच्ची हल्दी के इस्तेमाल के दौरान निकलने वाला रंग हल्दी पाउडर की तुलना में काफी ज्यादा गाढ़ा और पक्का होता है।

कच्ची हल्दी, अदरक की तरह दिखाई देती है।

इसे ज्यूस में डालकर, दूध में उबालकर, चावल के व्यंजनों में डालकर, अचार के तौर पर, चटनी बनाकर और सूप में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है।

कच्‍ची हल्‍दी देखने में बिल्‍कुल अदरक की तरह होती है। हल्दी में सूजन को रोकने का खास गुण होता है इसलिये यह गठिया रोगियों को जोंडो के दर्द से काफी आराम पहुंचाती है।

आइये जानते हैं कच्‍ची हल्‍दी का कैसे प्रयोग करना चाहिये।

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सर्दी-खांसी और जुखाम:

रात को सोने से पहले अगर आप हल्‍दी वाला दूध पियेंगे तो, ना सिर्फ अच्‍छी नींद आएगी बल्‍कि आपकी सर्दी भी दूर भाग जाएगी।

इस दूध में गुड या शक्‍कर मिक्‍स कर सकते हैं।

 

 

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अगर कच्‍ची हल्‍दी को लहसुन और घी के साथ खाया जाए, तो पेट दर्द या फिर अपच से राहत मिलती है।

कच्‍ची हल्‍दी को खाने से पहले उसे उबाल लें।

 

 

गले की खराश:

कच्‍ची हल्‍दी गले की सूजन को कम करती है। इसका सेवन करने के लिये 1 छोटा चम्‍मच कच्‍ची हल्‍दी का पेस्‍ट लें और उसमें ½ छोटा चम्‍मच लहसुन का पेस्‍ट और 1 छोटा चम्‍मच गुड मिलाएं।

इस मिरण को गरम करें और खाएं। इसको दिन में दो बार लेना चाहिये।

 

हल्दी के खास गुणों से अमूमन हर कोई परिचित होता है।

भारतीय खाने की हल्दी के बिना कल्पना करना भी मुश्किल है। हल्दी का उपयोग पाचन तंत्र को सुधारने में, सूजन कम करने में और शरीर के शोधन में हजारों सालों से उपयोग किया जा रहा है। इसमें पाया जाने वाले तत्व करक्यूमिनोइड्स और वोलाटाइल तेल कैंसर रोग से लड़ने के लिए भी जाने जाते हैं।

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कच्ची हल्दी, अदरक की तरह दिखाई देती है। इसे ज्यूस में डालकर, दूध में उबालकर, चावल के व्यंजनों में डालकर, अचार के तौर पर, चटनी बनाकर और सूप में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है। 

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